Maulana Azizul Haque al-Umari

Ayah by Ayah

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Maulana Azizul Haque al-Umari translation for Surah An-Nazi'at — Ayah 45

79:45
إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخۡشَىٰهَا ٤٥
आप तो केवल उसे डराने वाले हैं, जो उससे डरता है।1
Footnotes
  • [1] इस आयत में कहा गया है कि (ऐ नबी!) सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आप का दायित्व मात्र उस दिन से सावधान करना है। धर्म बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं। जो नहीं मानेगा, उसे स्वयं उस दिन समझ में आ जाएगा कि उसने क्षण भर के सांसारिक जीवन के स्वार्थ के लिए अपना स्थायी सुख खो दिया। और उस समय पछतावे का कुछ लाभ नहीं होगा।