Maulana Azizul Haque al-Umari

Ayah by Ayah

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Maulana Azizul Haque al-Umari translation for Surah Al-Fajr — Ayah 20

89:20
وَتُحِبُّونَ ٱلۡمَالَ حُبّٗا جَمّٗا ٢٠
और तुम धन से बहुत अधिक प्रेम करते हो।1
Footnotes
  • [1] इन आयतों में समाज की साधारण नैतिक स्थिति का सर्वेक्षण किया गया है, और भौतिकवादी विचार की आलोचना की गई है, जो मात्र सांसारिक धन और मान मर्यादा को सम्मान तथा अपमान का पैमाना समझता है और यह भूल गया है कि न धनी होना कोई पुरस्कार है और न निर्धन होना कोई दंड है। अल्लाह दोनों स्थितियों में मानवजाति की परीक्षा ले रहा है। फिर यह बात किसी के बस में हो तो दूसरे का धन भी हड़प कर जाए, क्या ऐसा करना कुकर्म नहीं जिसका ह़िसाब लिया जाना चाहिए?