Maulana Azizul Haque al-Umari

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Maulana Azizul Haque al-Umari translation for Surah Ad-Duhaa — Ayah 9

93:9
فَأَمَّا ٱلۡيَتِيمَ فَلَا تَقۡهَرۡ ٩
अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।1
Footnotes
  • [1] इन आयतों में अल्लाह ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से फरमाया है कि तुम्हें यह चिंता कैसे हो गई है कि हम अप्रसन्न हो गए? हमने तो तुम्हारे जन्म के दिन से निरंतर तुमपर उपकार किए हैं। तुम अनाथ थे, तो तुम्हारे पालन और रक्षा की व्यवस्था की। राह से अंजान थे, तो राह दिखाई। निर्धन थे, तो धनी बना दिया। ये बातें बता रही हैं कि तुम आरंभ ही से हमारे प्रियवर हो और तुमपर हमारा उपकार निरंतर रहा है।