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Hindi Mokhtasar tafsir for Surah Al-Ahqaf — Ayah 8

أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۖ قُلۡ إِنِ ٱفۡتَرَيۡتُهُۥ فَلَا تَمۡلِكُونَ لِي مِنَ ٱللَّهِ شَيۡـًٔاۖ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَا تُفِيضُونَ فِيهِۚ كَفَىٰ بِهِۦ شَهِيدَۢا بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡۖ وَهُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ٨
क्या ये मुश्रिक लोग कहते हैं : मुहम्मद ने इस क़ुरआन को गढ़कर अल्लाह की ओर मनसूब कर दिया है?! (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : यदि मैंने इसे अपनी मर्ज़ी से गढ़ लिया है और इसके कारण अल्लाह मुझे यातना देना चाहे, तो तुम मुझे बचा नहीं सकते। तो फिर मैं इसे अल्लाह पर गढ़कर अपने आपको यातना से कैसे पीड़ित कर सकता हूं?! तुम क़ुरआन पर जो आरोप और मुझपर जो लांछन लगा रहे हो, उसे अल्लाह बहुत अच्छी तरह से जानता है। वह महिमावान मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में पर्याप्त है। तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला, उनपर दया करने वाला है।