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Hindi Mokhtasar tafsir for Surah Al-Fath — Ayah 10

إِنَّ ٱلَّذِينَ يُبَايِعُونَكَ إِنَّمَا يُبَايِعُونَ ٱللَّهَ يَدُ ٱللَّهِ فَوۡقَ أَيۡدِيهِمۡۚ فَمَن نَّكَثَ فَإِنَّمَا يَنكُثُ عَلَىٰ نَفۡسِهِۦۖ وَمَنۡ أَوۡفَىٰ بِمَا عَٰهَدَ عَلَيۡهُ ٱللَّهَ فَسَيُؤۡتِيهِ أَجۡرًا عَظِيمٗا ١٠
निश्चय जो लोग (ऐ रसूल!) आपसे मक्का के बहुदेववादियों से लड़ने के लिए 'बै'अते रिज़वान' कर रहे हैं, वे दरअसल अल्लाह से बै'अत कर रहे हैं; क्योंकि वही है जिसने उन्हें मुश्रिकों से लड़ने का आदेश आदेश दिया है और वही उन्हें बदला देगा। बै'अत के समय अल्लाह का हाथ उनके हाथों के ऊपर है और वह उनके बारे में जानता है, उनकी कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। फिर जिसने अपनी बै'अत तोड़ दी और अल्लाह से उसके धर्म का समर्थन करने का जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया, तो उसके अपनी बै'अत को तोड़ने तथा अपने वचन को भंग करने का नुक़सान उसी पर लौटने वाला है। क्योंकि इससे अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। और जिसने अल्लाह से उसके धर्म का समर्थन करने का अपना वादा पूरा किया, तो अल्लाह उसे शीघ्र ही बहुत बड़ा प्रतिफल प्रदान करेगा और वह जन्नत है।