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Hindi Mokhtasar tafsir for Surah Al-Mujadila — Ayah 12

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا نَٰجَيۡتُمُ ٱلرَّسُولَ فَقَدِّمُواْ بَيۡنَ يَدَيۡ نَجۡوَىٰكُمۡ صَدَقَةٗۚ ذَٰلِكَ خَيۡرٞ لَّكُمۡ وَأَطۡهَرُۚ فَإِن لَّمۡ تَجِدُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ ١٢
जब सहाबा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बहुत ज़्यादा कानाफूसी करने लगे, तो अल्लाह ने फरमाया : ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूल से गुप्त रूप से बात करना चाहो, तो गुप्त रूप से बात करने से पहले सदक़ा पेश करो। यह सदक़ा पेश करना तुम्हारे लिए उत्तम और अधिक पवित्र है। क्योंकि उसमें अल्लाह का आज्ञापालन है, जो दिलों को शुद्ध (पवित्र) करता है। अगर तुम्हें सदक़ा करने के लिए कुछ न मिले, तो उनसे गुप्त रूप से बात करने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला और उनपर दया करने वाला है। यही कारण है कि उसने उन्हें केवल उसी चीज़ का बाध्य किया है,जो वे कर सकते हैं।