क्या (ऐ रसूल) आपने उन मुनाफ़िक़ो (पाखंडियों) को नहीं देखा, जिन्होंने उन यहूदियों को मित्र बना लिया, जिनपर उनके कुफ़्र और पापों के कारण अल्लाह क्रोधित हुआ? ये मुनाफ़िक़ न तो मोमिनों में से हैं और न यहूदियों में से। बल्कि वे दुविधा में पड़े हुए हैं, न इधर के हैं, न उधर के। तथा वे क़समें खाते हैं कि वे मुसलमान हैं, और उन्होंने मुसलमानों की सूचनाएँ यहूदियों को नहीं पहुँचाई हैं। जबकि वे अपनी क़सम में झूठे हैं।