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Hindi Mokhtasar tafsir for Surah Al-Hashr — Ayah 2

هُوَ ٱلَّذِيٓ أَخۡرَجَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ مِن دِيَٰرِهِمۡ لِأَوَّلِ ٱلۡحَشۡرِۚ مَا ظَنَنتُمۡ أَن يَخۡرُجُواْۖ وَظَنُّوٓاْ أَنَّهُم مَّانِعَتُهُمۡ حُصُونُهُم مِّنَ ٱللَّهِ فَأَتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِنۡ حَيۡثُ لَمۡ يَحۡتَسِبُواْۖ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ ٱلرُّعۡبَۚ يُخۡرِبُونَ بُيُوتَهُم بِأَيۡدِيهِمۡ وَأَيۡدِي ٱلۡمُؤۡمِنِينَ فَٱعۡتَبِرُواْ يَٰٓأُوْلِي ٱلۡأَبۡصَٰرِ ٢
वही है, जिसने अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वाले बनी नज़ीर को, मदीना में स्थित उनके घरों से, मदीना से शाम (लेवांत) की ओर उनके पहले ही देश-निकाला के समय निष्कासित कर दिया। ये तौरात वाले यहूदियों में से थे। यह उनके अपनी प्रतिज्ञा को तोड़ देने और उसपर मुश्रिकों के साथ हो जाने के बाद हुआ। अल्लाह ने उन्हें शाम की ओर निकाल दिया। जबकि वे इस क़दर शक्तिशाली और ताक़तवर थे कि तुमने (ऐ मोमिनो!) सोचा भी नहीं था कि उन्हें कभी अपने घरों से निकलना पड़ेगा। और वे खुद भी समझ रहे थे कि उनके बनाए हुए क़िले उन्हें अल्लाह की पकड़ और यातना से बचा लेंगे। लेकिन अल्लाह की पकड़ उनके पास वहाँ से आई, जहाँ से आने का उन्हें अनुमान नहीं था। चुनाँचे अल्लाह ने अपने रसूल को उनसे युद्ध करने और उन्हें उनके घरों से निकाल बाहर करने का आदेश दे दिया। साथ ही अल्लाह ने उनके दिलों में अत्यधिक भय डाल दिया। वे अपने घरों को अंदर से अपने ही हाथों से विध्वंस कर रहे थे, ताकि मुसलमान उनसे लाभ न उठा सकें तथा मुसलमान उन्हें बाहर से विध्वंस कर रहे थे। अतः ऐ समझ-बूझ रखने वालो! इन लोगों को इनके कुफ़्र के कारण जिस चीज़ का सामना करना पड़ा, उससे सीख ग्रहण करो। इसलिए उनकी तरह मत बनो, अन्यथा उन्हीं के जैसे बदले और सज़ा का सामना करना पड़ेगा।