(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : वही 'रहमान' है, जो तुम्हें अकेले अपनी इबादत के लिए आमंत्रित करता है। हम उसपर ईमान लाए, तथा अकेले उसी पर हमने अपने मामलों भरोसा किया है। चुनाँचे शीघ्र ही तुम्हें - अनिवार्य रूप से - पता चल जाएगा कि कौन स्पष्ट गुमराही में है और कौन सीधे रास्ते पर है।