अल्लाह ने उस महिला (अर्थात् ख़ौला बिंत सा'लबा) की बात सुन ली, जो (ऐ रसूल!) आपसे अपने पति (अर्थात् औस बिन सामित) के बारे में, जब उसने उससे 'ज़िहार' कर लिया था, बहस कर रही थी और उसके पति ने उसके साथ जो कुछ किया था, उसकी अल्लाह से शिकायत कर रही थी। और अल्लाह तुम दोनों की बात-चीत सुन रहा था। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को देखने वाला है। उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं रहती।