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Hindi Mokhtasar tafsir for Surah Al-Mujadila — Ayah 2

ٱلَّذِينَ يُظَٰهِرُونَ مِنكُم مِّن نِّسَآئِهِم مَّا هُنَّ أُمَّهَٰتِهِمۡۖ إِنۡ أُمَّهَٰتُهُمۡ إِلَّا ٱلَّٰٓـِٔي وَلَدۡنَهُمۡۚ وَإِنَّهُمۡ لَيَقُولُونَ مُنكَرٗا مِّنَ ٱلۡقَوۡلِ وَزُورٗاۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٞ ٢
जो लोग अपनी पत्नियों से 'ज़िहार' करते हैं; इस प्रकार कि उनमें से कोई अपनी पत्नी से कहता है : ''तुम मुझपर मेरी माँ की पीठ की तरह हो", वे अपनी इस बात में झूठे हैं। क्योंकि उनकी पत्नियाँ उनकी माँएँ नहीं हैं। बल्कि उनकी माँएँ केवल वे स्त्रियाँ हैं, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया। वे इस तरह की बात कहकर निश्चित रूप से एक घृणित बात और झूठ कहते हैं। और अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है। इसलिए उसने उन्हें पाप से मुक्त करने हेतु उनके लिए 'कफ़्फ़ारा' (प्रायश्चित) का नियम बनाया है।